हरसिद्धि माता मंदिर
उज्जैन का शक्तिपीठ, जहाँ माँ के लिए दीपों के दो स्तंभ जगमगाते हैं
आज का दर्शन-क्रम. समय भारतीय मानक समय में.

श्री हरसिद्धि माता मंदिर उज्जैन में रुद्र सागर के किनारे, महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग से कुछ ही कदम की दूरी पर स्थित है। परंपरा इसे उन शक्तिपीठों में गिनती है जहाँ माता सती की कोहनी गिरी मानी जाती है, और माँ हरसिद्धि को सम्राट विक्रमादित्य की कुलदेवी के रूप में याद किया जाता है। मंदिर की सबसे बड़ी पहचान इसके दो ऊँचे दीप स्तंभ हैं, जिन पर संध्या आरती के समय सैकड़ों तेल के दीप एक साथ प्रज्वलित किए जाते हैं।
- प्रधान देवी
- माँ हरसिद्धि; गर्भगृह में महालक्ष्मी, महासरस्वती और अन्नपूर्णा भी विराजमान
- परंपरा
- शाक्त परंपरा; शक्तिपीठ के रूप में पूजित, जहाँ सती की कोहनी गिरी मानी जाती है
- किसलिए प्रसिद्ध
- लगभग 51 फीट ऊँचे दो दीप स्तंभ, जो संध्या आरती पर प्रज्वलित होते हैं
- काल
- परंपरा के अनुसार स्थापना सम्राट विक्रमादित्य ने की; वर्तमान भवन मराठा काल का है
- पवित्र प्रतीक
- मंदिर में शक्ति का प्रतीक श्रीयंत्र प्रतिष्ठित है
- स्थान
- रुद्र सागर के पास, महाकालेश्वर मंदिर से लगभग 500 मीटर, उज्जैन
- प्रमुख पर्व
- शारदीय नवरात्रि और चैत्र नवरात्रि
- प्रवेश
- सभी श्रद्धालुओं के लिए निःशुल्क
दर्शन समय
दर्शन का समय
- सामान्य दर्शनप्रतिदिनसुबह 5:00 से शाम 7:00
यह समय मध्य प्रदेश पर्यटन के अनुसार है। कुछ अन्य स्रोत मंदिर के रात 9 या 10 बजे तक खुले रहने की बात कहते हैं, और व्यवहार में संध्या आरती के दौरान भी दर्शन चलते रहते हैं। नवरात्रि में समय बढ़ा दिया जाता है। कृपया स्थानीय स्तर पर पुष्टि कर लें।
आरती व नित्य क्रम
- प्रातः आरतीप्रतिदिनसुबह 7:00 से सुबह 8:00
अधिकांश स्रोत प्रातः आरती का समय सुबह 7 से 8 बजे के बीच बताते हैं; एक स्रोत में 5:30 बजे लिखा है।
- संध्या आरती और दीप स्तंभ प्रज्वलनप्रतिदिनशाम 6:00 से शाम 7:00
दीप स्तंभों की तैयारी और प्रज्वलन आरती से लगभग एक घंटा पहले शुरू हो जाता है। समाचारों में उद्धृत मंदिर के पुजारी और मध्य प्रदेश पर्यटन, दोनों आरती का समय लगभग शाम 7 बजे बताते हैं, इसलिए कार्यक्रम 7 बजे के बाद तक चल सकता है। सूर्यास्त के अनुसार समय थोड़ा बदलता रहता है।
पर्व, ग्रहण और विशेष अवसरों पर समय बदल सकता है। यात्रा से पहले मंदिर में पुष्टि कर लें।
पूरा समय-क्रम देखेंपूजा व सेवा
ऑनलाइन केवल स्थान सुरक्षित होता है। दक्षिणा मंदिर के काउंटर पर ही दी जाती है, इस वेबसाइट पर कोई भुगतान नहीं लिया जाता।
- इस पूजा के बारे में पूछें
दीपमालिका (दीप स्तंभ प्रज्वलन)
यह यहाँ की सबसे प्रसिद्ध सेवा है। श्रद्धालु प्रायः मनोकामना पूरी होने पर दोनों स्तंभों के तेल और बाती का खर्च उठाते हैं, और दीप संध्या आरती पर जलाए जाते हैं। बुकिंग मंदिर कार्यालय से होती है और तारीखें महीनों पहले भर जाती हैं। वर्ष 2023 की समाचार रिपोर्टों में सामूहिक बुकिंग का शुल्क ₹3,100 प्रति श्रद्धालु और दोनों स्तंभ जलाने का खर्च लगभग ₹15,000 बताया गया है। वर्तमान शुल्क की पुष्टि मंदिर से करनी चाहिए।
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प्रातः आरती
दीप, घंटियों और स्तुति के साथ देवी की दैनिक प्रातःकालीन पूजा। श्रद्धालु इसमें निःशुल्क शामिल हो सकते हैं।
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संध्या आरती
संध्या की आरती, जो प्रांगण में जगमगाते दीप स्तंभों के बीच होती है। यह दिन का सबसे अधिक भीड़ वाला अनुष्ठान है और इसके लिए कोई टिकट नहीं लगता।
वर्ष भर के पर्व
- आश्विन शुक्ल प्रतिपदा से नवमी तक (सितंबर या अक्टूबर)
शारदीय नवरात्रि
यह मंदिर का सबसे बड़ा पर्व है। नौ दिनों तक देवी का भव्य शृंगार होता है, दीप स्तंभ हर शाम प्रज्वलित होते हैं और सुबह से ही श्रद्धालुओं की कतारें लग जाती हैं। शाम को विशेष आरती होती है और प्रशासन गर्भगृह में प्रवेश को नियंत्रित करता है।
- नवरात्रि की अष्टमी और नवमी
दुर्गा अष्टमी और महानवमी
ये नवरात्रि के सबसे प्रमुख दिन हैं। स्कंद पुराण में महानवमी को हरसिद्धि के लिए विशेष रूप से पवित्र बताया गया है, और इन दो दिनों में सबसे अधिक भीड़ रहती है।
- चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से नवमी तक (मार्च या अप्रैल)
चैत्र नवरात्रि
वसंत की यह नवरात्रि हिंदू नववर्ष के साथ शुरू होती है। इसमें भी नौ दिन पूजन होता है और हर रात दीप स्तंभ प्रज्वलित किए जाते हैं।